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‘उ’ (U) से लड़कियों के नाम (Baby Girl Names Starting With U In Hindi): प्राचीन समय से नामांकरण की प्रक्रिया की चलती आ रही है नाम जिसका कोई मतलब हो दैनिक जीवन में लड़की का नाम उसे एक अलग पहचान देती है हम सभी जब किसी को बुलाते हैं तब उसके नाम से पहचानते हैं । भारत सहित कई अन्य देशों में भी नाम से जुड़े है यदि किसी बच्चे का नाम करण जब किया जाता है तब उसके अनुसार ही बच्चे प्रभावशाली और आकर्षण होते हैं इसके साथ यह भी माना जाता है कि अर्थ पूर्ण नाम रहने से…

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हर माता-पिता की एक ही ख्वाहिश होती है कि उनकी बेटी राजकुमारी की तरह रहे चाहे वह अपने घर में ही रहे या अपने ससुराल में ही रहे । और आप जानते ही होंगे कि नाम के अनुसार उनके स्वभाव में भी प्रभाव पड़ते हैं इसलिए जब भी आप नामकरण करते हैं तो थोड़ा टाइम ले सकते हैं लेकिन अच्छा नाम जरूर रखें । आप नाम इस तरह चुने जो सुनने मधुर लगे ऐसा नाम बिल्कुल भी ना चुनें जिससे आपके कानों में भी चुभता हो और तेजी से पुकारने पर अजीब लगता है इस तरह बिल्कुल भी ना चुनें…

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जब एक मां बेटी को जन्म देती है और जब डॉक्टर आपसे आकर कहते हैं कि आपके घर लक्ष्मी पधारी है तो घर वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है । लड़की के जन्म के बाद सबसे पहला काम जो हर माता पिता सोचते हैं वह होता है उनका नाम। बहुत ऐसे माता पिता है जो पहले ही अपने बच्चों का नाम करण कर देते हैं। आजकल के जीवन काल में नाम बहुत महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि नाम उस बच्ची के जीवन में काफी व्यक्तित्व और महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि आप तो कभी ना कभी देखे ही होंगे कुछ…

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वैसे तो माना जाता है कि बच्चे भगवान का दिया हुआ नायाब तोहफा होते हैं। हमें उन्हें उनके कुदरती रूप में ही स्वीकार करना चाहिए। इसलिए इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह किस रंग रूप के हैं।  हर माँ चाहती है,  कि उसका बच्चा सबसे सुंदर और दाग रहित हो, और यह है बात मां के प्यार को दर्शाती है। इसलिए वह अपने बच्चे के सुंदरता को बढ़ाने के लिए अलग-अलग नुस्खे को अपनाते है, परंतु विज्ञान के अनुसार, ज्यादातर बच्चों का रंग रूप उनके माता-पिता के जैसा ही होता है। शिशु का कुदरती रंग भी बदला नहीं…

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सभी माता पिता अपने बच्चो को लेकर हर बात के लिए Concern होते है। और अगर हमारा बच्चा बार बार उलटी करे या मुँह से दही जैसा कुछ निकले या दूध पलट दे तो ये और भी परेशानी वाली बात बन जाती है। जब मेरा बीटा अनीश छोटा था तो उसको भी उल्टी होने की Problem होती थी तो मैंने कुछ बातो पे ध्यान दिया जिन बातो से मुझे काफी Help मिली जो में आज आपके साथ Share कर रही हु। हम ये देखते है की बच्चो का उलटी करना शुरू के छह महीनो में ज्यादा होता है। पर क्या…

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भारत (India) में परंपरा है की जब बच्चा 6 महीने का होजाता हैं तो उसका अन्नप्राशन संस्कार किया जाता हैं। अन्नप्राशन संस्कार का मतलब होता है की अब बच्चा ठोस आहार या सॉलिड फ़ूड (Solid Food) खाने के लिए तैयार हैं और अब हम बच्चे को माँ के दूध (Breast Milk) के अलावा भी दूसरा आहार देना शुरू कर सकते है। लेकिन हमे ये नहीं भूलना चाहिए की 6 महीने के बच्चे का मुख्य आहार माँ का दूध यानि Mother’s Breast Milk ही होता है। 6 Months तक बच्चे को सिर्फ माँ का दूध ही देना चाहिए और किसी कारण…

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